तस्‍वीरों में देखें, अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा, कृष्‍णा मेनन मार्ग से निकला पार्थिव शरीर

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दिल्ली पुलिस की जगह सेना ने अटल जी की अंतिम यात्रा की कमान संभाली है. अटल जी की अंतिम यात्रा सेना के वाहन में निकाली जाएगी.

Shared News | Updated: 17 अगस्त, 2018 10:33 AM

नई दिल्ली: अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में लोग पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आवास पर पहुंच रहे थे. इसके चलते ही उनका पार्थिव शरीर कृष्‍णा मेनन मार्ग से 9 बजे की जगह 10 बजे बीजेपी मुख्‍यालय के लिए ले जाया गया. नयी दिल्ली के लुटियंस जोन में कृष्णा मेनन मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 6-ए के आसपास सुरक्षा का भारी बंदोबस्त किया गया. पुलिस और यातायात पुलिस के साथ-साथ वहां अर्द्धसैनिक बलों के जवानों की भी तैनाती की गयी है. 6 कृष्ण मेनन मार्ग पर अटल बिहारी वाजपेयी के पार्थिव शरीर को बीजेपी मुख्‍यालय ले जाया जा रहा है. नौ सेना, वायु सेना, थल सेना के जवान अटल जी के पार्थिव शरीर के साथ मौजूद हैंं. दिल्ली पुलिस की जगह सेना ने अटल जी की अंतिम यात्रा की कमान संभाली है. अटल जी की अंतिम यात्रा सेना के वाहन में निकाली जाएगी. अटल बिहारी वाजपेयी का पार्थिव शरीर कृष्‍णा मेनन मार्ग से बीजेपी दफ्तर ले जाया जा रहा है. देखें फोटो

अटल जी के घर से सेना के वाहन मे पार्थिव शव बीजेपी ऑफिस के लिये निकला. आगे तीनों सेना के अंगों का बैंड . थल, नौ और वायुसेना के जवान अपने हथियार को झुकाए मार्च करते हुए.

सेना के जिस वाहन में अटल बिहारी वाजपेयी के पार्थिव शरीर को उनको निवास से बीजेपी ऑफ़िस में लेकर जाया जायेगा. उसमें अटल बिहारी वाजपेयी के परिवार के लोगों के साथ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी रहेंगे.  

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, वाजपेयी के अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास के दरवाजे सुबह करीब साढ़े सात बजे खोले गये. बाद में वाजपेयी का पार्थिव शरीर भारतीय जनता पार्टी के दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित नव-निर्मित मुख्यालय पर ले जाया जाएगा. ‘राष्ट्रीय स्मृति’ स्थल के लिए उनकी अंतिम यात्रा दोपहर एक बजे शुरू होगी.    
लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को एम्स में वाजपेयी का निधन हो गया. वह 93 वर्ष के थे. सुबह कृष्णा मेनन मार्ग पहुंचने वालों में शामिल 52 वर्षीय योगेश कुमार उत्तराखंड के उत्तरकाशी से अपने नेता के अंतिम दर्शन को आये हैं.    लोग पूरी रात यात्रा करके दिल्ली आये हैं ताकि अपने नेता को एक अंतिम बार देख सकें. कुमार का दावा है, ‘1984 में जब वाजपेयी जी गंगोत्री जाने के दौरान उत्तरकाशी में रूके थे, तब मैं उनसे मिला था. 1986 में वह फिर से उत्तरकाशी आये.’ कुमार अपने साथ याद के रूप में अपनी और वाजपेयी जी की तस्वीर लेकर आये हैं. उनका कहना है, मैं अपने साथ गंगोत्री से गंगाजल लेकर आया हूं. आशा करता हूं कि उन्हें अंतिम बार देख सकूंगा.    
 




 

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