समुद्र की परिक्रमा करने वाली हिमाचल की प्रतिभा, KBC में अपना अनुभव साझा करेंगी

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विश्व कीर्तिमान स्थापित करने वाली हिमाचली बेटी लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्वाल ‘कौन बनेगा करोड़पति’ शो में अनुभव साझा करेगी।

कुल्लू [कमलेश वर्मा]। प्रतिभा का परिचय
देवभूमि कुल्लू घाटी के मौहल की प्रतिभा ऐसे ही समुद्र की गहराई तक नहीं पहुंची है। इसके पीछे उसका कठिन परिश्रम छिपा है। प्रतिभा स्कूल समय से ही साहसिक खेलों का शौक रहा है। वह ब्यास नदी में राफ्टिंग करते करते भारतीय नौसेना में शामिल होकर सागर परिक्रमा पर निकल पड़ी। प्रतिभा जम्वाल ने दसवीं पिडमाउंट स्कूल भुंतर से की और जमा दो अरुणोदय स्कूल से पास की है। प्रतिभा ने एसएसबी के तहत परीक्षा दी थी और जिसके बाद 2002 में नेवी में उसका चयन हुआ था।




एजीमाला में प्रतिभा ने प्रशिक्षण प्राप्त किया और गोवा में सबसे पहले पोस्टिंग हुई। सागर परिक्रमा पर निकली भारतीय नेवी महिला के दल ने दूसरा पड़ाव भी पार कर लिया है। इस दल में इंडियन नेवी की छह महिला अफसरों की टीम में लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्वाल भी शामिल हैं। पिछले साल सितंबर के पहले हफ्ते में परिक्रमा पर रवाना हुई टीम करीब आठ माह में यात्रा पूरी की।



समंदर की प्रचंड लहरों का सामना कर विश्व कीर्तिमान स्थापित करने वाली हिमाचली बेटी लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्वाल ‘कौन बनेगा करोड़पति’ शो में अनुभव साझा करेगी। कुल्लू जिला के मौहल की यह बेटी सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाले शो में समुद्र परिक्रमा के दौरान 254 दिन तक पेश आई चुनौतियों के बारे में बताएगी। लेफ्टिनेंट प्रतिभा जम्वाल के पिता रवि जम्वाल ने बताया उनकी बेटी 24 अगस्त को कौन बनेगा करोड़पति शो में भाग लेगी और समुद्र परिक्रमा की चुनौतियों और रोमांचक पल के बारे में बताएगी।


टीम तारिणी की सदस्य प्रतिभा जम्वाल को पहलीअगस्त से छह सितंबर तक देश के विभिन्न कोनों में बुलाया जा रहा है और उन्हें इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया जा रहा है। प्रतिभा जम्वाल को अब तक महाराष्ट्र, गुजरात, केरला सहित अन्य राज्यों के स्कूलों और अन्य संस्थानों में सम्मानित किया गया है। इसी कड़ी में प्रतिभा 24 अगस्त को कौन बनेगा करोड़पति शो में भाग लेने के लिए मुबंई जाएंगी। इसके पश्चात 25 अगस्त को सबसे स्मार्ट कौन शो में प्रतिभा और टीम तारिणी की सदस्य अंशुम शर्मा विचार रखेंगी।


दस सितंबर को शुरू की थी यात्रा : टीम तारिणी की यह यात्रा पिछले साल दस सितंबर को आरंभ हुई थी और यह विश्व की पहली ऐसी सागर परिक्रमा है जिसमें सिर्फ महिलाएं ही शामिल थीं। उक्त मिशन के दौरान टीम ने कई चुनौतियों से पार पाया। तीन बार समुद्री लहरों ने उन्हें चुनौती दी तो 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं का सामना भी करना पड़ा। इसके अलावा मॉरीशस के पास तारिणी का स्टीय¨रग सिस्टम बॉक्स तूफान की चपेट में आया तो तारिणी को वापसी की राह पकड़नी पड़ी। टीम ने यह सफर 21 मई को पूरा किया है। टीम तारिणी में लेफ्टिनेंट प्रतिभा जम्वाल, लेफ्टिनेंट वर्तिका जोशी, लेफ्टिनेंट पी स्वाथी, लेफ्टिनेंट एश्वर्य बी, लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता व लेफ्टिनेंट विजया देवी शामिल थी।



दस सितंबर को शुरू की थी यात्रा : टीम तारिणी की यह यात्रा पिछले साल दस सितंबर को आरंभ हुई थी और यह विश्व की पहली ऐसी सागर परिक्रमा है जिसमें सिर्फ महिलाएं ही शामिल थीं। उक्त मिशन के दौरान टीम ने कई चुनौतियों से पार पाया। तीन बार समुद्री लहरों ने उन्हें चुनौती दी तो 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं का सामना भी करना पड़ा। इसके अलावा मॉरीशस के पास तारिणी का स्टीय¨रग सिस्टम बॉक्स तूफान की चपेट में आया तो तारिणी को वापसी की राह पकड़नी पड़ी। टीम ने यह सफर 21 मई को पूरा किया है। टीम तारिणी में लेफ्टिनेंट प्रतिभा जम्वाल, लेफ्टिनेंट वर्तिका जोशी, लेफ्टिनेंट पी स्वाथी, लेफ्टिनेंट एश्वर्य बी, लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता व लेफ्टिनेंट विजया देवी शामिल थी।


प्रदेश सरकार से नहीं मिला सम्मान : रवि जम्वाल लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्वाल के पिता का कहना प्रतिभा और टीम तारिणी के इस जज्बे को जहां देश सलाम कर रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस टीम की पीठ थपथपाई है। लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से प्रतिभा को किसी तरह का सम्मान नहीं मिल पाया है।



55 फीट की ‘आइएनएसवी तारिणी’ बोट में उन्होंने 254 दिन का सफर किया और दुनिया का चक्कर लगाया। नेवी की इन छह महिला नाविकों ने अपनी जांबाजी से नया इतिहास रच दिया है। 140 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बहती समुद्री हवाएं, करीब आठ से नौ मीटर तक उठती लहरें और तापमान माइनस छह, लेकिन उनके हौसले डिगे नहीं, उन्होंने अपनी नाव को तेज हवाओं के रुख से मोड़ा और खतरनाक तूफान को छूती हुई निकल गईं अपने सफर में आगे, बहुत आगे। इनके मुख का तेज, गर्व का अहसास और जीत की मुस्कुराहट देखते ही बनती है। इन्होंने अपनी यात्रा के दौरान 21,600 नॉटिकल मील की दूरी तय की और दो बार भूमध्य रेखा, चार महाद्वीपों और तीन सागरों को पार किया।


लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने इस अभियान का नेतृत्व किया और लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल, लेफ्टिनेंट कमांडर स्वाति पी, लेफ्टिनेंट ऐश्वर्या बोड्डापति, लेफ्टिनेंट एस विजया देवी और लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता क्रू की मेंबर्स रहीं। इन सभी महिलाओं ने 55 फीट की ‘आइएनएसवी तारिणी’ के जरिए अपनी कठिन यात्रा पूरी की। नेवी की इन बहादुर महिलाओं को इस अभियान के लिए तैयार करने में करीब तीन साल लगे।


ये जांबाज महिलाएं जब प्रशांत महासागर से गुजर रही थीं तो इन्हें समुद्र का रौद्र रूप भी देखने को मिला। भयंकर तूफान का अहसास होते ही इन्होंने अपनी बोट का रुख बदल दिया। ये घबराई नहीं, सूझबूझ से फैसले लिए और तूफान से बचकर निकलने में सफल हो गईं। 140 किलोमीटर प्रति घंटा के वेग से हवा थी। एक स्थिति ऐसी भी आई कि एक भारी लहर नाव पर आ गई। कॉकपिट में पानी आ गया। सभी ने इस तूफान का सामना किया। जिस नाव पर ये सब सवार थीं उसकी एक खासियत थी कि वह हवा का रुख देखकर मुड़ जाती है और रुक जाती है।



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